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पैग़म्बर और औलिया के वसीले से दुआ मांगना

पैग़म्बर और औलिया के वसीले से दुआ मांगना कहाँ तक सही है.
कुछ लोग दुआ करते वक्त कभी औलिया के वसीले से कभी पैग़म्बरों के वसले से अल्लाह को राज़ी करने की कोशिश करते हैं और  दुआ मांगते हैं. ये कहाँ तक सही है और हदीस-ओ-क़ुरआन में इसके बारे में क्या ज़िक्र है, आइये देखते हैं:

क़ुरआन और हदीस से वसीला की दलील और उनकी हकीकत :

दलील
"ऐे ईमान वालों, अल्लाह से डरो और उसकी तरफ वसीला तलाश करो "
(सूरह अल-मैदा आयत 35)
इस आयत में अल्लाह फरमाता है के अल्लाह की तरफ वसीला तलाश करो,

क़ुरान और हदीस की रौशनी में वसीला की हकीकत

वसीला क्या है और दुआ के वक्त वसीला लेना कैसा है?
वसीला के मानी हैं अल्लाह से क़ुरबत तलाश करना.
वसीला के बारे में  हदीस में भी ज़िक्र आया है. कई हदीसों में ऐसा ज़िक्र मिलता है के वसीला से दुआ मांगी गयी और दुआ क़ुबूल भी हुई.

(पढ़ें - पैग़म्बर और औलिया के वसीले से दुआ मांगना)

अब सवाल ये उठता है के वसीला के तौर पे हम क्या कहें या किसको अपना वसीला बनायें. इस सवाल का जवाब देने के पहले आइये वसीला की किस्मों पे ग़ौर करते हैं.
वसीला की हदीसों और क़ुरआन की आयतों पे ग़ौर करने पर वसीले की दो किस्में समझ आती हैं:
1. सही/जायज़ वसीला
2. ग़लत/नाजायज़ वसीला